Essay On My Favourite Sports Player In Hindi

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Short Essay on 'Sachin Tendulkar' in Hindi | 'Sachin Tendulkar' par Nibandh (300 Words)

Short Essay on 'Sachin Tendulkar' in Hindi | 'Sachin Tendulkar' par Nibandh (300 Words)
सचिन तेंदुलकर

'सचिन तेंदुलकर' का पूरा नाम सचिन रमेश तेंदुलकर है। उनका जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर था। उनके पिता ने सचिन का नाम अपने चहेते संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था। सचिन तेंदुलकर का विवाह अंजलि तेंदुलकर से हुआ। सचिन के दो बच्चे हैं - सारा और अर्जुन।

सचिन तेंदुलकर ने सन् 1989 में मात्र 16 वर्ष की उम्र में अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के पश्चात् बल्लेबाजी में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने टेस्ट व एक दिवसीय क्रिकेट, दोनों में सर्वाधिक शतक अर्जित किये हैं। वे टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं।

वर्ष 2012 में सचिन तेंदुलकर राज्य सभा के सदस्य बनने के लिए नामित हुए। दिसंबर 2012 में उन्होने एकदिवसीय क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा की। ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट से उन्होने अक्टूबर 2012 में सन्यास लिया और १६ नवम्बर 2013 में उन्होने अपना आखिरी मैच खेला जो कि वेस्ट इंडीज के खिलाफ था और 200 वाँ मैच था।

सचिन तेंदुलकर को 1994 में अर्जुन अवॉर्ड, 1997 में राजीव गाँधी खेल रत्न, 1999 में पद्मश्री और 2008 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। 16 नवंबर, 2013 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न दिए जाने का फ़ैसला किया गया' जो अब तक सबसे कम उम्र वाले को और एक खिलाड़ी को दिया गया। वे पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें इंडियन एयर फोर्स द्वारा ग्रुप कॅप्टन का रैंक मिला है।

सचिन क्रिकेट जगत के सर्वाधिक प्रायोजित खिलाड़ी हैं और विश्व भर में उनके अनेक प्रशंसक हैं। उनके प्रशंसक उन्हें प्यार से भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते हैं जिनमें सबसे प्रचलित लिटिल मास्टर व मास्टर ब्लास्टर है। अंतत: सचिन तेंदुलकर के बारे में यही कहना उचित होगा कि धरती पर ऐसे होनहार यदा कदम ही जन्म लेते हैं। सचिन तेंदुलकर निश्चय ही भारत का गौरव हैं।  

साइना नेहवाल


स्टार शटलर, 'साइना नेहवाल' का जन्म 17 मार्च 1990 को गाज़ियाबाद, भारत के धिंदर गांव में हुआ था। साइना के पिता डाo हरवीर सिंह एक वैज्ञानिक हैं। उनकी माता श्रीमती ऊषा नेहवाल स्वयं पूर्व बैडमिंटन चैंपियन रह चुकी हैं। साइना वर्त्तमान में अपने परिवार के साथ ही हैदराबाद, भारत में रहकर पढ़ाई कर रही हैं।

बैडमिंटन के प्रति साइना का रुझान बचपन से ही था। साइना ने सफलता पाने के लिए सदैव अपने उद्देश्य पर निशाना साधा। हर पल और हर कदम अपने टारगेट के बारे में सोंचा। साइना ने बड़े मुकाम पर पहुँचने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करी। वह प्रति दिन कम से कम 7 से 8 घंटे अपनी प्रैक्टिस पर देती हैं। साइना अब तक कई बड़ी उपलब्धियाँ अपने नाम कर चुकी हैं।

साइना ने लंदन ओलंपिक गेम्स 2012 में कांस्य पदक जीता। बैडमिंटन मे ऐसा करने वाली साइना भारत की पहली खिलाङी हैं। इसके साथ ही 2010 में महिला सिंगल्स में स्वर्ण, वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण के अलावा उन्होंने कई चैंपियनशिप जीती हैं। साइना वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय हैं। वे इंडोनेशियन ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

साइना ने भारत में बैडमिंटन का क्रेज बढ़ाया। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री एवं सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से अलंकृत एवं सम्मानित किया जा चुका है। आज बैडमिंटन और साइना नेहवाल एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं।

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